कविता · Reading time: 1 minute

मति भ्रम!

अति भ्रम , मति भ्रम
न कोई हमसा , न कोई में हैं हम
न बुद्धि ,विवेकम
न कोई कमी , हर जगह हमीं हम

मैं से पूरित अति, विश्वासी
है सत्य असत्य , असत्य सियासी
है मंदी अक्ल की
घुमरि सबसे चतुर हम

-जारी
-©कुल’दीप’ मिश्रा

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