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मतगयंद सवैया

ATUL PUNDHIR

ATUL PUNDHIR

कविता

May 29, 2017

दीप वही तम जो हरता जुगनू जलता न जला तम पाये
प्यास हरे हर बूँद सुधा बसुधा हर पीर पिये मुसकाये
नीरज कीचड़ अंग लगे अपनी पर कोमलता न भुलाये
दीप बने न सुधा मनु है मनु तो मनु के मन पीर बड़ाये

अतुल पुण्ढीर

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ATUL PUNDHIR

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