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मजदूर

…मजदूर…
मजदूर हूँ
पर मजबूर नहीं हूँ,
अपनों से दूर हूँ
इसलिए
भूख से कम
अपनों के लिए ज्यादा
परेशान हूँ।
थककर चूर भी हूं
भूख से बेहाल भी हूँ,
फिर भी परिवार के
सकुशल होने की आस में भी हूँ,
तभी सुकून में
घर की ओर बढ़ भी रहा हूँ।
कुछ अच्छे कुछ बुरे भी
हैं जमाने में,
तभी तो हम भी हैं
दुनिया के आशियाने में।
किसी ने भोजन, पानी
किसी ने मान दिया
किसी ने प्यार से
सोने का स्थान दिया।
सुबह अपनेपन से विदा किया
अधिक नहीं लेकिन
दिन भर की भूख मिटाने का
सामान दिया।
इसीलिए निःसंकोच
पूरे विश्वास से आगे बढ़ रहा हूँ,
अपनों के बीच होने की
उम्मीदों में जी रहा हूँ।
किसी दिन तो
मंजिल को पर पहुँच जाऊँगा,
अपनों को पाकर धन्य हो जाउँगा।
✍सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा(उ.प्र.)
8115285921

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संक्षिप्त परिचय ============ नाम-सुधीर कुमार श्रीवास्तव (सुधीर श्रीवास्तव) जन्मतिथि-01.07.1969 शिक्षा-स्नातक,आई.टी.आई.,पत्रकारिता प्रशिक्षण(पत्राचार) पिता -स्व.श्री ज्ञानप्रकाश श्रीवास्तव माता-स्व.विमला देवी धर्मपत्नी,-अंजू श्रीवास्तवा पुत्री-संस्कृति, गरिमा संप्रति-निजी कार्य स्थान-गोण्डा(उ.प्र.) साहित्यिक गतिविधियाँ-विभिन्न विधाओं की रचनाएं कहानियां,लघुकथाएं…
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