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मच्छर संग वार्तालाप

एक दिन मच्छर आके मुझसे बोला।
मान्यवर बताओ मेरा गुनाह क्या है।।
मैंने तपाक से कहा रे मच्छर …
तु जो चट से आकर ….
पट से बैठकर ।
झट से काट उठता है।
क्या ये किसी गुनाह से कम है ?
पुन: उसने कहा वो कैसे और क्यों ?
रक्तपान करते हो और मलेरिया फैलाते हो।
क्या तुममें लेषमात्र भी कुछ अनुशासन बचा है।
जो इतने मासूमों का खून पीने के बाद भी शर्म तक डकार जाते हो।
और पूछते हो कैसे और क्यों ?
मैंने फिर से कहा है मेरे सुन्दर प्यारे मच्छर ।
इस जग में कितने पड़े हैं नर किंकर।।
मुझ अबोध को ही क्यों काट जाते हो।
हे मच्छर करना हो अगर प्रहार ।
तो मैं ही क्यों पड़े हैं देश में कई हजार ।।

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Bharat Bhushan Pathak
Bharat Bhushan Pathak
DUMKA
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कविताएं मेरी प्रेरणा हैं साथ ही मैं इन्टरनेशनल स्कूल अाॅफ दुमका ,शाखा -_सरैयाहाट में अध्यापन...