बाल कविता · Reading time: 1 minute

मच्छर संग वार्तालाप

एक दिन मच्छर आके मुझसे बोला।
मान्यवर बताओ मेरा गुनाह क्या है।।
मैंने तपाक से कहा रे मच्छर …
तु जो चट से आकर ….
पट से बैठकर ।
झट से काट उठता है।
क्या ये किसी गुनाह से कम है ?
पुन: उसने कहा वो कैसे और क्यों ?
रक्तपान करते हो और मलेरिया फैलाते हो।
क्या तुममें लेषमात्र भी कुछ अनुशासन बचा है।
जो इतने मासूमों का खून पीने के बाद भी शर्म तक डकार जाते हो।
और पूछते हो कैसे और क्यों ?
मैंने फिर से कहा है मेरे सुन्दर प्यारे मच्छर ।
इस जग में कितने पड़े हैं नर किंकर।।
मुझ अबोध को ही क्यों काट जाते हो।
हे मच्छर करना हो अगर प्रहार ।
तो मैं ही क्यों पड़े हैं देश में कई हजार ।।

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