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मगरमच्छ

Rajeev 'Prakhar'

Rajeev 'Prakhar'

कविता

June 16, 2016

मोटे-ताजे-रसीले व्यंजनों के शौकीन,
एक मगरमच्छ का दिल,
एक नेताजी पर,
मचल गया था l
नेताजी का स्वास्थ्य,
उसे रास आ़या,
इसलिये वह उन्हें,
पूरा का पूरा,
निगल गया था l
परन्तु, निगलते ही,
उसका शरीर भीतर से,
बुरी तरह उबल गया l
नेताजी की नेतागिरी,
पचा न पाया,
इसलिये उन्हें,
जीवित ही,
वापस बाहर उगल दिया l

(सर्वाधिकार सुरक्षित)

– राजीव ‘प्रखर’
मुरादाबाद (उ. प्र.)
मो. 8941912642

Author
Rajeev 'Prakhar'
I am Rajeev 'Prakhar' active in the field of Kavita.
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