मकर संक्रान्ति मुबारक बच्चे

जब से परिंदों ने खुद के शौक को जामा पहनाया है
तब से हमारी जिंदगी मे ठहराव आया है

अब सुबह उठकर टिफिन बनाने की जद्दोजहद नही होती
स्टॉपेज पे छोड़कर सोने की जल्दी नही होती

जिद्द और फरमाइश करने वाला अब अपनी ख्वाहिश खुद के अरमानो से पूरी करता है
ख्वाबो की तस्वीर मे खुद के रंग भरता है
जब से वो अपने स्वप्नो की उड़ान भरने लगा है
तब से हमारी जिंदगी मे ठहराव आया है

याद है संक्रान्ती पे वो पंतगों की जिद्द करता था
न मिलने पर रो रो के घर भरता था
आज न पंतगों की ख्वाहिॉश है
न लटाई मे मॉझा की फरमाइश है
खुद की अपेछाओ के पेज लड़ाने मे मशगूल रहने लगा है
तब से हमारी जिंदगी मे ठहराव आया है
मकर संक्रान्ती मुबारक हो बच्चे

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