मकरंद

गुंजित सुमनों के अधर,जब नेहों के छंद।
केसरिया के रंग से, झड़ते हैं मकरंद।।

कवि वसंत पर लिख रहे, कविता दोहा छंद।
हर्फ – हर्फ में है भरी, मीठा सा मकरंद।।
-लक्ष्मी सिंह

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