मंहगी सब्ज़ियाँ

दोहे
(१)बैठ सब्जी बाज़ार में,अपनी आँखें सेंक। ख़रीदना मुमकिन नहीं ,ख़ाली नज़रें फेंक।।
(२)सब्जी जी ही क्रुद्ध नहीं,जिंसों में भी उछाल। लञ्च डिनर पे टेबुल पर,मचता रोज़ बवाल।।
(३)सब्जी अगर मँहगी मिले,खाओ रोटी दाल ।दाल पकते समय मगर,जम कर पानी डाल।।

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