मंथन

विषय – मंथन

समुद्र मंथन हुआ देवों और दानवों के बीच ।
अब मंथन हो मानवों के बीच ।।
अब हो मंथन अच्छाई और बुराई का ।
अब विनाश हो मानव के मन की बुराई की खाई का ।।
बस जाए अब हर मन में मानवता ।
बुराई रूपी रहे ना दानव ना रहे दानवता ।।
जिस दिन ये मंथन सफल हो गया ।
बुराई रूपी दानव विफल हो गया ।।
जिस दिन हर मानव मन में मानवता बस जाएगी ।
उस दिन पृथ्वी , पृथ्वी ना रहेगी स्वर्ग बन जाएगी ।।

– नवीन कुमार जैन

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