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मंथन

आयु के अंतिम पड़ाव पर
एक छोर पर खड़ी
एक ज़िन्दगी
इतिहास बनने को उत्सुक
दुविधा में पड़ी
मंथन कर रही है
क्या दिया है उसने संसार को
उसके ज़िंदा होने का उपहार I

तीसरे महायुद्ध की आशंका
परमाणु युद्ध की विभीषिका
क्षत विक्षित ओज़ोन की चेतावनी
श्वेत श्याम की कहानी
खोखले मूल्यों पर खोखले भाषण
पर्यावरण की ज़ुबानी
या फिर ऐसा इंसान
जो विवेक खो चुका हो
आतंक, उग्र , अलगाववाद के
दलदल में धंसा
कैंसर एड्स और नशे में फंसा
इंसानियत का मुखोटा पहने
इंसानियत को ही रो रहा हो।
——————————–
सर्वाधिकार सुरक्षित/त्रिभवन कौल

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त्रिभवन कौल
त्रिभवन कौल
दिल्ली
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