मुक्तक · Reading time: 1 minute

मँजिल

चल उठ ,कभी तो चल,

कभी तो सफ़र पर निकल,

रास्तों पर ना इंतजार कर,

क्या पता कोई मँजिल ,

तेरा रास्ता निहारती हो।

#सरितासृजना

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