मुक्तक · Reading time: 1 minute

भ्रस्टाचार आचार

सरे आम अब बिक रहा भ्रस्टाचार आचार …
जनता खाने लग रही हो कर के लाचार…
हो कर के लाचार समझ में कछु नही आवे.
खावे जो तो मरा , मरा जो भी नही खावे..
..रमेश शर्मा…

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