मुक्तक · Reading time: 1 minute

समल चित् -समान है/प्रीतिरूपी मालिकी/ हिंद प्रीति-गान बन

(1)
समल चित् -समान है
………………………
सजगताभिमान है|
सुबुधि गह महान है|
भाव बिन सदैव नर|
समल चित्-समान है|

चित्=चित्त

(2)
प्रीतिरूपी मालिकी
…………………….
ईश-पथ का जाम पी
बनो ज्ञान -पालकी
मिलेगी सहज-सुबुद्धि
प्रीतिरूपी मालिकी

(3)
हिंद-प्रीति-गान बन
……………………
जनम भूमि मान बन
अहं–छोड़, ध्यान बन
“नायक” सुदिव्य-विज्ञ
हिंद-प्रीति-गान बन

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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1) प्रकाशित कृतियाँ 1-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" काव्य संग्रह 2-"क्रौंच सु ऋषि आलोक" खण्ड काव्य/शोधपरक ग्रंथ 3- "पं बृजेश कुमार नायक की चुनिंदा रचनाएं" काव्य संग्रह उक्त तीनों कृतियाँ सम्पूर्ण विश्व…
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