भोली है माँ नही समझती

***भोली है माँ नही समझती **
**********
जो भी होता होनें दे , माँ डर डर के कहती है!
अच्छे दिनों की आस में , वो चुप चुप रोती रहती है!

फैंकता है कोई पत्थर तो, नही टोकती है उसको !
फेंका फेंकी झूठी मूठी, उम्मीदों से चिपकी रहती है!

रोज बैंक के चक्कर काटे, ले पास बुक हाथों में
खाली गैस सेलेण्डर देख, सुबह शाम जलती रहती है!

कौन समझाये अब माँ को , कुछ नही होने वाला है
झूठ समझती बात को मेरी, मुझसे लडती रहती है!

भोली है माँ नही समझती, “सागर” फेंकी बातों को
बस फेंकी बातों में ही,अब उसके अटकी रहती है!
*****
बैखोफ शायर/गीतकार/लेखक
डाँ. नरेश कुमार “सागर”
****
11/9/18

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 17

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share