” भोर “

लावण्यमय है भोर धवल ,
सुरम्य श्वेत कली कमल ,
सुरभित सरोवर में तुहिन बिंदु,
अरुण आभा में खिल कमल|
…निधि…

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"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको" View full profile
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