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भोर से पहले—-

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

कविता

March 21, 2017

समय चूक जाये
पर वो नहीं रुकती
उजाले से पहले
भोर से पहले
आ जाती है
वो नन्ही सी चिड़िया
मधुर गीत गाती
निमिष भर देर नहीं होती
जब तक जीवन है
वो चहचहायेगी
गीत गायेगी
हम सबको मीठे संगीत से जगायेगी।
हम आज की बात कल भूल जाते हैं
हर पल चूक जाते हैं
पहरेदारी में भी पाबंद नहीं
चिड़िया तो बिना कहे
समय से पहले
रोज आ जाती है!
हम कभी
चिड़िया जैसे नहीं बन सकते।
चिड़िया होते तो शायद!
सोचते ।

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Author
मुकेश कुमार बड़गैयाँ
I am mukesh kumarBadgaiyan ;a teacher of language . I consider myself a student & would remain a student throughout my life.

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