Skip to content

भोर से पहले—-

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

कविता

March 21, 2017

समय चूक जाये
पर वो नहीं रुकती
उजाले से पहले
भोर से पहले
आ जाती है
वो नन्ही सी चिड़िया
मधुर गीत गाती
निमिष भर देर नहीं होती
जब तक जीवन है
वो चहचहायेगी
गीत गायेगी
हम सबको मीठे संगीत से जगायेगी।
हम आज की बात कल भूल जाते हैं
हर पल चूक जाते हैं
पहरेदारी में भी पाबंद नहीं
चिड़िया तो बिना कहे
समय से पहले
रोज आ जाती है!
हम कभी
चिड़िया जैसे नहीं बन सकते।
चिड़िया होते तो शायद!
सोचते ।

Share this:
Author
मुकेश कुमार बड़गैयाँ
I am mukesh kumarBadgaiyan ;a teacher of language . I consider myself a student & would remain a student throughout my life.

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you