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भोर का आनंद लै लो

छन्द – रजनी

मापनी युक्त मात्रिक ।
23 मात्रा , 19 – 9 पर यति ।
यह छन्द राधा का वाचिक रूप है ।
मापनी – 2122 2122 2122 2

शांत सुन्दर-सी उषा की लालिमा छाई।
भोर का आनंद ले लो जाग जा भाई।

रात काली जा रही नव चाँदनी बिखरी।
स्वर्ण माला-सी सुनहरी हर दिशा निखरी।
ये मनोरम दृश्य है अत्यंत सुख दाई।
भोर का आनंद ले लो जाग जा भाई।

शुद्ध निर्मल मंद मनमोहक हवा चलती
ताजगी तन में सुखद नव चेतना भरती।
स्वप्न अलसाये सभी नव जिन्दगी पाई।
भोर का आनंद ले लो जाग जा भाई।

राग पंछी की मधुर रस कर्ण में घोले।
बाग में उड़ते भ्रमर -षटकीट दल डोले।
खिल गई कलियाँ सभी हर पुष्प मुस्काई
भोर का आनंद ले लो जाग जा भाई।

प्रात की बेला सुखद मन मुग्ध कर जाती।
सूर्य की पहली किरण दुख दर्द हर जाती।
सूर्य किरणें संग अपने रौशनी लाई।
भोर का आनंद ले लो जाग जा भाई।
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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