गीत · Reading time: 1 minute

भोजपुरी बिरह गीत

आज कुछ बिशेष मित्र लोगन क आग्रह पर हमऊँ भोजपुरी बिरह गीत लिखे क कोशिस करत बानी इहे आशा से की आप सभे लोगन के पसंद आई, चुकी हई हमार प्रथम प्रयास बा ओहि से आप लोगन से करजोर विनती बा की अगर कउनो त्रुटि होई त ओके हमार संज्ञान में जरूर डालब जा…..🙏🏻

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जनतीन जे बाबूजी हम, उनकर करनीया।
फौजी क बनतीन नाही, कबो दुलहिनिया।।

मेंहदी न छूटल हाथें, गइले पियऊ छोड़के,
केसे कहीं की कइसन, सपना रहली जोड़के,
रतिया काटें छाला डाले, लगली चंदनिया।
फौजी क बनतीन नाही, कबो दुलहिनिया।।

डाहें ले एक त छुट्टी, मिलत नइखे बोल के,
कीमती समइयां हमर, जाए बिना मोल के,
अइहन त घुरिहन हितई, लेईके संघतिया।
फौजी क बनतीन नाही, कबो दुलहिनिया।।

छोटकी के करे नाही देईम, चाहे सर धुन ल,
चाही नाही फौजी जीजा, पापा बात सुन ल,
हमहि अघाईल बानी सब, सह सह रहनिया।
फौजी क बनतीन नाही, कबो दुलहिनिया।।

सुखवा नसीब नाहि, होला खाली धन से,
साथ रहे जब परिवार, सब खुशी मन से,
निक लागे तीज त्योहार, तबही समनिया।
फौजी क बनतीन नाही, कबो दुलहिनिया।।

संगे शिमला, कश्मीर, जयपुर, घूमे जइतीन,
नया नया शहर देखी के, खूबे सुख पइतीन,
चिद्रूप खाली देवें झांसा, माने ना कहनिया।
फौजी क बनतीन नाही, कबो दुलहिनिया।।

जनतीन जे बाबूजी हम, उनकर करनीया।
फौजी क बनतीन नाही, कबो दुलहिनिया।।

©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप”
(सर्वाधिकार सुरक्षित ०७/०२/२०१९ )

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