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भैया आतीं याद पुरानी वो बातें

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गीत

August 6, 2017

भैया आती याद पुरानी वो बातें
बचपन में करते थे रोज खुराफातें

तुम दुश्मन भी सबसे बड़े हमारे थे
मगर जान से ज्यादा हमको प्यारे थे
झगड़े अपने होते वही पुराने थे
भैया बचपन के दिन बहुत सुहाने थे
अब तो हो भी पाती नहीं मुलाकातें
भैया आती याद पुरानी वो बातें

राखी पर क्या धूम धड़ाका मचता था
नेग मुझे कुछ देना तुम्हें अखरता था
मैं भी लड़ लड़ कर पैसे ले लेती थी
टॉफी लेकिन लाकर तुमको देती थी
मिलती नहीं अब तुमसे वैसी सौगातें
भैया आती याद पुरानी वो बातें

नई नई कागज़ की नाव बनाते थे
भीग भीग कर आँगन में तैराते थे
मम्मी के कदमों की आहट पाते थे
झट दरवाजे के पीछे छुप जाते थे
ढूँढे अब भी आँखें वो ही बरसातें
भैया आती याद पुरानी वो बातें

खुद तो मुझ पर कितना रोब जमाते थे
मेरी खातिर पर सबसे लड़ जाते थे
देर रात तक हम दोनों ही पढ़ते थे
भूख लगे तो पाक कला भी पढ़ते थे
जाग जाग कर काटी हैं कितनी रातें
भैया आती याद पुरानी वो बातें

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद
06-08-2018

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Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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