May 13, 2021 · गीत
Reading time: 1 minute

भेज रहा हूँ पास आपके ताजे ताजे गीत।

भेज रहा हूँ पास आपके ताजे ताजे गीत।
आगे आप निभाना अपनी संपादक की रीत।

चाहो तो दे देना अपनी पुस्तक में स्थान ,
रद्दी की ढेरी में होने देना या अवसान ,
लेकिन कम न होगी अपनी कविताई से प्रीत।

भेज रहा हूँ ——–

गीत कह रहा हूँ लेकिन जो रचनाएँ भेजी हैं,
शब्दों भावों से भरकर सब ललनाएँ भेजी हैं,
गीत कहें, कविता कह लें या कह लें हैं नवगीत।

भेज रहा हूँ ———

पर दावा है महक आप तक निश्चित ही पहुँचेगी,
ह्रदय के इक कोने को तो निश्चित ही रंग देगी,
बन न पाएं चाहे पुस्तक पन्नो के ये मीत।

भेज रहा हूँ ———–।

10 Likes · 5 Comments · 55 Views
Copy link to share
Kumar Kalhans
55 Posts · 2.9k Views
Follow 15 Followers
गीत , मुक्तक , दोहा , ग़ज़ल , छंद मुक्त कविता , कहानी इत्यादि विधाओं... View full profile
You may also like: