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भू-जल संग्रह दोहावली

AWADHESH NEMA

AWADHESH NEMA

दोहे

March 12, 2017

धरती माँ की कोख में, जल के हैं भंडार ।
बूंद-बूंद को तड़प रहे, फिर भी हम लाचार ।।

दोहन करने के लिये, लगा दिया सब ज्ञान ।
पुनर्भरण से हट गया, हम लोगों का ध्यान ।।

गहरे से गहरे किये, हमने अपने कूप ।
रही कसर पूरी करी, लगा लगा नलकूप ।।

जल तो जीवन के लिये, होता है अनमोल ।
पर वर्षा के रूप में, मिलता है बेमोल ।।

अगर संजोते हम इसे, देकर पूरा ध्यान ।
सूखा बाढ़ न झेलते, रहता सुखी जहान ।।

आओ मिल-जुल रोक लें, हम वर्षा की धार ।
कूप और नलकूप फिर, कभी न हो बेकार ।।

बूंद-बूंद जल रोकिये, भरिये जल भंडार ।
पुनर्भरण से कीजिए, अब अपना उद्धार ।।

मेहनत से बढ़ जायेगा, भू-जल का भंडार ।
मानो नेक सलाह यह, कहे अवधेश कुमार ।।

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Author
AWADHESH NEMA
मध्यप्रदेश शासन कृषि विभाग में उप संचालक कृषि, आई आई टी खरगपुर से वर्ष 1984 में भूमि एवं जल संरक्षण अभियांत्रिकी से एम. टेक.। अध्ययन यात्रा हेतु आस्ट्रेलिया भ्रमण । आई टी प्रयोग तथा उत्कृष्ट लोकसेवा प्रबंधन हेतु मुख्यमंत्री पुरूस्कार... Read more

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