भूले से भी तुम मत आना

“कृष्णा से प्रार्थना “

“हास्य व् व्यंग रचना “

भूले से भी तुम मत आना ,
भारत में गिरधारी।
सच कहता हूँ गिरिवर नागर,
इस बार पड़ेगी भारी।
दूध -दही माखन है नकली ,
नकली दुनिया सारी ,
भूले से भी तुम मत आना ,
भारत में गिरधारी।

घर -घर में धृतराष्ट्र यहाँ –
हर चेहरे में छुपा दुर्योधन है।
राजनीति और राष्ट्रनीति में,
शकुनि का नया प्रयोजन है।
भीष्म -कर्ण और द्रोणाचार्य ,
कोर्ट -कचहरी पाओगे।
भूले से भी मत आना अब-
वर्ना तुम पछताओगे।

गोकुल की गलियां सूनी हैं
सूनी हैं मांग सुहागिन की।
तोड़ी कली ,पूर्व खिलने के ;
खुशियां सूनी हैं आँगन की।
हर चौराहे चीर -हरण तुम –
द्रुपद -सुता का पाओगे।
भूले से भी मत आना अब-
वर्ना तुम पछताओगे।

डांस बार में मिले राधिका ,
बेणु -धुन किसे सुनाओगे।
भिक्षुक के भेष में है कपटी-
कहाँ भेष सुदामा पाओगे।
अर्जुन और युधिष्ठर को ,
कहाँ ढूँढोगे और पाओगे।
भूले से भी मत आना अब-
वर्ना तुम पछताओगे।

यमुना मैली ,मैला ढोती
निर्मल कैसे उसे बनाओगे।
यमुना -तट वीरान हुवा –
कहाँ खेल खेलने जाओगे।
चारा इंसां खा जाते हैं
गउअन कहाँ चराओगे।
भूले से भी मत आना अब-
वर्ना तुम पछताओगे।

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