Skip to content

भूख और मज़हब

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

कविता

December 7, 2017

भूख तेरे मिटने पर,
पेट तेरे भरने के बाद,
नख़रे हज़ार हो जाते है,
मज़हब की शुरुआत,
बस यहीं से होती है,
.
सही सुना है,
भूखे पेट न होय,
हरि भजन गोपाला,
.
भूख दो रोटी की,
जिस किसी की भी मिट जाती है,
उसका ही ध्यान रहस्य पर नहीं,
ध्यान खुद पे खुद स्वाद पर होता है,
.
क्यों हम भूखे रोते है,
पेट भरते ही,
भूखे का ही निवाला हरते है,
प्राण है अन्न,
इसीलिए तड़फते है,
.
ठीक सुना आपने,
बकरी खाती घास-पात,
लोग ताको करें हलाल,
ते जन कौन उपाय,
जो बकरी खात है ।।
अर्थात् :-बकरी शाकाहारी है,
वह बेमौत मारी जाती है,
जो लोग मांसाहार करते है,
उनकी गति क्या होगी !!
.
महेंद्र

Share this:
Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you