.
Skip to content

भुजंगी छंद (मुक्तक )

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

मुक्तक

August 31, 2016

यही अर्चना है यही भावना
करो पूर्ण माते सभी कामना
बुरे वक़्त में छोड़ना माँ नहीं
बढ़ा हाथ आगे तुम्हीं थामना

पुरानी चले ज़िन्दगी चाल है
बिछाती यहाँ मोह का जाल है
हँसाती रुलाती लुभाती हुई
हमें ले चले वो जहाँ काल है

जुदाई तुम्हारी सताती हमें
नहीं नींद आके सुलाती हमें
वफ़ा भी सजा आज तो हो गयी
मिले दर्द भी तो हँसाती हमें

डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
Recommended Posts
हरदम खेल दिखाये
नए ज़िन्दगी देखो हमको हरदम खेल दिखाये अगर हँसाती हमें कभी तो ये ही हमें रुलाये एक मदारी है ईश्वर औ हम सब यहाँ जमूरे... Read more
मुक्तक
देखकर जिसको हमें करार मिलता है! ऐसा नसीब से हमें प्यार मिलता है! याद करता हो हमें हर घड़ी दिल़ से, ऐसा कभी कभी हमें... Read more
दीदारे दिल
मुक्तक. दीदारे दिल सुनो दीदार दिलवर का. हमें हर शाम करना है. हमारे गीत हर नगमें. तुम्हारे नाम करना है. चले जाये सनम जब हम.... Read more
तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला
तुमसे बिछड़ के दिल को ठिकाना नहीं मिला तुम सा कहीं भी हमको दीवाना नहीं मिला सपनें रहे अधूरे गिला ये रहा हमें वो चाहतों... Read more