गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

भीगी पलकें

तुमको देखा तो भोर हुई ,
मन में हर्ष हिलोर हुई ,
विकल हृदय की धड़कन भी ,
पा तुम्हें भाव – विभोर हुई ।
रुठी जब प्रिय तुम मुझसे ,
भीगी पलकों की कोर हुई ,
ढूंढा फिर दिशि -दिशि तुमको ,
न जाने तुम किस छोर हुई ।

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