भिखारी एक पेशा

पेशा या मज़बूरी
गौर करना है जरूरी –

टूटा हाथ दिखाकर
लोगों को गुमराह बनाते हैं,
कर्म नही मक्कारी करके
अपना काम चलाते हैं ,
रहम कर रहमत वाले ऐसा कह अपनी इच्छा करते पूरी
पेशा या ….

नजरों से हीं भांप लेते
दूर से हीं जाच लेते
कौन कितना है दयालु ?
पैसे हीं चाहिए इनको , नही चाहिये अनाज-आलू
बोल देतें है अटपट ये ,जब मांग रह जाय अधूरी
पेशा या …..

इन सबको देखकर
आदमी कर देता है इन्कार
पता हीं नही चलता
कौन वास्तव में है वेबस लाचार,
दिन के भिखमंगे ये रात को रखते छूरी
पेशा या…..

दिखतें हैं जो भिखारी
उनका गिरोह है भारी
भोले-भाले लोगों को
ठगना इनका काम,
गलत करते हैं
लेकर ईश्वर का नाम ,
देते देते जेब खाली हो जाएगी रखिये इनसे दूरी
पेशा या मजबूरी ।

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