दोहे · Reading time: 1 minute

भाषा

शर्मिंदा जिसको करे, निज भाषा का ज्ञान।
ऐसा मूरख आदमी , होता कब इंसान।।

सन्तोष कुमार विश्वकर्मा सूर्य

11 Views
Like
You may also like:
Loading...