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भावनाएं नाजुक होती हैं,

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

कविता

October 17, 2017

वो मुझे रोकती रही,
और मैं आगे बढ़ गया,
वो मेरा जुनून था,
उसको डर,
तन्हाई बढ़ जाने का,

न मुझे कुछ मिला,
न उसे कुछ हासिल,

उसके अश्क
फिर भी मोतियों-सम सजे,
मुझे लोगों ने काफ़िर कहा,

डॉ महेंद्र सिंह खालेटिया,

Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !
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