कविता · Reading time: 1 minute

भारत ही हर ओर है

शोर है हां शोर है हर जगह यह शोर है
हर दिशा हर जगह हर मुल्क में हर ओर है

सिर्फ भारत सिर्फ भारत भारत का ही जोर है

बाग ऐ बहिश्त धरा जहाँ की
आफरीन फिजा यहां की
सारी निकाहत इस जहां की, चड़ रहा वो भोर है

शोर है,,,,,,,,, भारत ही हर ओर है

हर ओर जहाँ फैला ये चमन
धरती से लेकर गगन
शांति का प्रतीक हवाओं में बिखरा अमन, मुहब्बतें हर ओर है

शोर है,,,,,,,,, भारत ही हर ओर है

राधा मीरा गीत गवैया
हर चौराहे राम रमैया
मुरलीमनोहर क्रष्ण कन्हैया दाता माखन चोर है

शोर है,,,,,,,,, भारत ही हर ओर है

कुदरत की सारी फिजायें कश्मीर में चूर है
अम्रितसर का स्वर्ण मंदिर कोई नूर है
मुहब्बत की दास्तां को ताजमहल मशहूर है यहां अलौकिकता घन्घोर है

शोर है,,,,,,,, भारत ही हर ओर है

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