Skip to content

कौन सी सोच हमें उभार सकती है,

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

कविता

October 8, 2017

प्रतिष्ठा की ..चाह में,
स्वाभिमान को बहुत बड़ा स्थान है,

“नारद” सम “हरी” रूप जनता,
बनती एक से एक ..महान है,

जाने रखती ..कैसे अपना ध्यान है,
है कौन सी चीज उनमें …विशिष्ट,
इस बात पर जाता नहीं कभी..ध्यान है,

ढ़ोह रहे है ..बोझ ..दूसरों का,
कहते फिरते है बस “महात्मा” महान है,

जाने है उनके पास “परख”का
……कौन आधार है ?
फँसे है खुद सम्मोहन के जाल में,
कहते फिरते है आत्मा अजर-अमर , अविनाशी और महान है,
बस इस एक बात का रखते संपूर्ण ध्यान है,

कैसे ? हो …”निजता की खोज”
जाता नहीं कभी ..ध्यान ..उस ओर है ?

कहते फिरते है,बस “महात्मा” जी महान है,
बस रखते इतना-सा ध्यान है,

कैसे हो हमारी दुर्दशा दूर,
कैसे हो भेद खत्म जाति,धर्म,इमान में,

सच में “महात्मा जी”महान है,
पर गया नहीं ..ध्यान कभी..उस ओर है,
“महात्मा जी” क्यों ? महान है,

गर जान लेते सिर्फ इतनी-सी बात,
डॉ महेंद्र सिंह खालेटिया,
भारत-वर्ष विकासशील नहीं,
विकसित ,स्वावलम्बी साथ में अग्रणी होता,

डॉ महेंद्र सिंह खालेटिया,
महादेव क्लीनिक, मानेसर(हरियाणा)

Share this:
Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you