Jan 25, 2019
कविता · Reading time: 1 minute

भारत वर्ष

भारत वर्ष की भूमि का गुणगान जहाँ में हो
यही हमारी कामना नवगान यहाँ से हो

एकता अखण्डता एवं समरसता की कड़ी
भारतवर्ष को जोड़े हर इक लड़ी
नव शक्ति के निर्माण में रहे सदा अग्रणी
विपदाए चाहे कितनी हो खड़ी

वीरों की इस धरती को नमन
सबसे प्यारा हमको अपना चमन
याद करो सन् सत्तावन और झांसी को
भगतसिंह वीर झूले, झूला समझ फाँसी को

तिरंगा जिसकी शान है वीरता ही पहचान
सोन चिडिया कहलाता मेरा भारत महान
पाक सम्भल बंद कर कुर्र कृत्य सारा
रोक नहीं पायेगा जो हिन्द का शेर दहाड़ा

यह धरती महाराणा प्रताप की शान है
हर वचन निभाएँ पन्नाधाय की पहचान है
वेद शास्त्रों धर्म पुराणों की पहचान है
हर मनुज करता इस धरती पे अभिमान है

भारत वर्ष की भूमि का गुणगान जहाँ में हो
यही हमारी कामना नवगान यहाँ से हो

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