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भारत में लोकतंत्र : उद्देश्य एवं उपलब्धियाँ

डॉ०प्रदीप कुमार

डॉ०प्रदीप कुमार "दीप"

लेख

April 10, 2017

“भारत में लोकतंत्र : उद्देश्य एवं उपलब्धियाँ ”
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जन का जनता के लिए ,जन का ऐसा कार |
अपनी मर्जी से चुनें , सुयोग्यतम सरकार ||
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” लोकतंत्र ” जनता का ,जनता के लिए और जनता के द्वारा निर्मित एक ऐसा सशक्त तंत्र है ,जो सदैव लोककल्याणकारी होता है | यह एक संवैधानिक व्यवस्था है ,जो संविधान के प्रावधानों के अनुरूप संचालित संप्रभुता
भारत में लोकतंत्र की स्थापना का उद्घोष भारतीय संविधान की उद्देशिका(प्रस्तावना) की प्रथम पंक्ति– “हम भारत के लोग”……… के द्वारा सुनिश्चित हुई है ,जिसमें भारत को प्रभुत्व सम्पन्न ,समाजवादी,पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के साथ ही न्याय, स्वतंत्रता, समानता ,बंधुत्व ,प्रतिष्ठा और अवसर की समता ,व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता के उच्चतम आदर्शों की स्थापना की गई है | चूँकि लोकतंत्र , सम्प्रभुता के सिद्धांत पर आधारित है अत: सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथ में होती है | हमारे देश में प्रत्यक्ष लोकतंत्र की बजाए अप्रत्यक्ष लोकतंत्र विद्यमान है , जिसमें लोगों के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि , जनता के वास्तविक प्रतिनिधि बनकर सत्ता की शक्ति का इस्तेमाल जनता और राष्ट्र के हित में करते हैं |

लोकतंत्र के उद्देश्य :~ चूँकि लोकतंत्र में जनता को सर्वोपरि स्थान दिया जाता है | जनता ही इसका केन्द्रीय विषय है | अत : लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य जनता और राष्ट्र हितों को प्राप्त करना है | लोकतंत्र के उद्देश्यों को निम्नांकित बिन्दुओं के माध्यम से समझ सकते हैं —
१. जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना :~ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में कोई भी व्यस्क नागरिक राष्ट्र-निर्माण और विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकता है तथा जनता का प्रतिनिधि बनकर जनप्रतिनिधित्व कर सकता है |
२. मूल अधिकारों की रक्षा करना :~ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में व्यक्ति के मूल अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जाता है ,ताकि वह शिक्षा ,समानता,स्वतंत्रता जैसे आदर्शों को संजोया जा सके |
३. राष्ट्र-हितों की रक्षा करना :~ लोकतंत्र जनता का ,जनता के लिए, जनता के द्वारा शासन होने के कारण इसके माध्यम से राष्ट्र-हितों को बल मिलता है और राष्ट्र-निर्माण और विकास में योगदान सदैव बना रहता है |
४. शक्तियों का विकेन्द्रीकरण :~ लोकतंत्र में शक्तियों का केन्द्रीकरण होने के तत्पश्चात विकेन्द्रीकरण अभीभूत होता है ,जिसमें वंचित और लक्षित वर्गों तक विकास संभव होता है तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचता है |
५. जवाबदेह ,पारदर्शी और उत्तरदायी शासन की स्थापना :~ लोकतंत्र में जनता की अप्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित होने के कारण जनप्रतिनिधियों में भय की भावना सदा बनी रहती है जिसके परिणामस्वरूप शासन में जवाबदेहता ,पारदर्शिता और उत्तरदायित्व का समावेश हो जाता है और शासन सुचारू रूप से संचालित होता है |
६. संवैधानिक शासन को मान्यता :~ लोकतंत्र में संविधान को सर्वोपरि मानते हुए उनके आदर्शों के अनुसार शासन संचालित होता है |
७. निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को मान्यता :~ लोकतंत्र में गुप्त मतदान प्रणाली को अपनाकर निष्पक्ष निर्वाचन प्रणाली की प्रतिस्थापना की गई है ,जो कि लोकतंत्र की रक्त-प्रणाली होती है |
८. कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना :~ भारत में लोकतंत्र के माध्यम से संवैधानिक शासन प्रणाली का अनुसरण करते हुए राज्य के नीति निदेशक तत्वों को समाहित किया गया है ,जिसका मूल उद्देश्य — कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है |
९. आदर्शों की स्थापना करना :~ लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में अनेक उच्चतम आदर्शों को समाहित किया गया है जो इस प्रकार हैं —
— स्वतंत्रता
— समानता
— बंधुता
— गरिमा
— एकता
— अखंडता
— न्याय
— प्रतिष्ठा
— संप्रभुताग

लोकतंत्र की उपलब्धियाँ :~ भारतीय समाजवाद “साम्यवादी लोकतंत्र” की अपेक्षा ” लोकतांत्रिक समाजवाद ” है | लोकतांत्रिक समाजवाद होने के कारण भारत “मिश्रित अर्थव्यवस्था” में विश्वास रखता है ,जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी साथ-साथ चलती हैं | अत: राष्ट्र-निर्माण और विकास में दोनों की भागीदारी सुनिश्चित होती है ,जो विविध विकासात्मक उपलब्धियों के लिए उत्तरदायी होते हैं | भारत में लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं —
१. समानता, स्वतंत्रता ,बंधुत्व और न्याय के आदर्शों की स्थापना |
२. पंचायती राज के माध्यम से शासन का विकेन्द्रीकरण |
३. महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता |
४. सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक न्याय की स्थापना |
५. आर्थिक समाजवाद के रूप में वैश्वीकरण , निजीकरण और उदारीकरण का उद्भव और विकास |
६. वंचित और गरीब नागरिकों का समाज की मुख्य धारा से जुड़ाव |
७. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कारण मानवाधिकारों और समाज के प्रति दृष्टिकोण का विकास |
८. प्रकृति-संस्कृति का सामंजस्य और जनजागरूकता का विकास |
९. सूचना के अधिकार की क्रियान्विती के परिणामस्वरूप जवाबदेहता ,पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की भावना का विकास |
१०. जनधन योजना ,मुद्रा योजना और मनरेगा जैसे कार्यक्रमों का सफलता पूर्वक क्रियान्वयन |
११. सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक विकास के द्वारा राष्ट्र-निर्माण की नींव मजबूत करना |
१२. सहकारिता के माध्यम से जनसहभागिता द्वारा नवाचार और नव-निर्माण करना |
१३. आधारभूत संरचना का विकास |
१४. नागरिकों के अधिकारों का संरक्षण |
१५. कल्याणकारी राज्य की स्थापना |
—————————————————– —– डॉ० प्रदीप कुमार “दीप”

Author
डॉ०प्रदीप कुमार
नाम : डॉ०प्रदीप कुमार "दीप" जन्म तिथि : 02/08/1980 जन्म स्थान : ढ़ोसी ,खेतड़ी, झुन्झुनू, राजस्थान (भारत) शिक्षा : स्नात्तकोतर ,नेट ,सेट ,जे०आर०एफ०,पीएच०डी० (भूगोल ) सम्प्रति : ब्लॉक सहकारिता निरीक्षक ,सहकारिता विभाग ,राजस्थान सरकार | सम्प्राप्ति : शतक वीर सम्मान... Read more
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