Jan 16, 2017 · कविता

भारत माँ की शान हो तुम... ...बेटियां.....

बेटी आँगन का फूल हो तुम…
जीवन स्वर में संगीत हो तुम…
मेरी आँखों में ज्योति हो तुम…
साँसों में प्राण मेरे हो तुम…
तुम से घर में उजियारा है….
तेरी पायल का छनकारा है…
तुम हो तो घर में बहारें हैं…
शमशान तेरे बिन ये सारे हैं…

नहीं चाह कोई भी ज्यादा मुझे…
तू जीवन भर खुशहाल रहे…
ना आश्रित किसी पे तू रहे…
न हो डर किसी का न बैर तुझे…
मत करना तू अभिमान कभी…
अभिमानी के आगे न झुकना कभी….
आकाश बड़ा आँचल हो तेरा…
सूर्य सा ओज हो चाँद सी शीतलता…
तेरे नाम से हो पहचान मेरी….
तेरे नाम से ही हो शान मेरी…

बस मेरा मश्वरा एक यही है…..
चाहे बोझ तुमपे यह भारी है….
पर शक्ति तुम में असीमित है…
यह कुदरत ने तुम में डाली है….
पत्थर दिल मत बनना तुम…
पत्थर बन मुसीबत से लड़ना तुम….
ललकारे गर जीवन में कोई…
धोबी पछाड़ से पछाड़ना तुम…
बढे हाथ किसी राक्षस का अगर…
दुर्गा बन सब संहारना तुम…
बन लक्ष्मी बाई देश जगाना है…
माँ टेरेसा जैसे भी संभालना है….

मत माँगना भीख किसी से तुम…
अधिकार स्वयं का पैदा करना तुम…
करो शौर्य बुलंद अपना इतना…
खुद खुदा पूछे क्या तेरा सपना….
अटल हो तुम परचंड हो तुम….
कर्म करो निर्भय हो कर तुम…
माँ बाप का गौरव मान हो तुम…
भारत माँ की शान हो तुम…

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उठे जो भाव अंतस में समझने की कोशिश करता हूँ... लिखता हूँ कही मन की...
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