मुक्तक · Reading time: 1 minute

भारत की माता

तरलता भी रहे मन में, जिगर फौलाद हो जाये ।
बने गाँधी मगर कुछ तो, भगत आजाद हो जाये।
यही बस चाह रखती है, सभी भारत की मातायें-
विवेकानन्द के जैसी, उसे औलाद हो जाये ।

विनय बाली सिंह।

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