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भारतवर्ष स्वराष्ट्र पूर्ण भूमंडल का उजियारा है

भारत पर स्वराष्ट्र पूर्ण भूमंडल का उजियारा है
विश्वबंधु-दीपक बन जलने वाला सुंदर -प्यारा है

लक्ष्मीबाई की कृपाण ने देख फिरंगी को मारा
मंगल पांडे,भगत सिंह औ राजगुरू ले ललकारा
तात्याटोपे, खुदीराम के खूँ का मिला सहारा है
भारतवर्ष स्वराष्ट्र पूर्ण भूमंडल का उजियारा है

वीर चंद्रशेखर की गर्जन, हिला रही शासन- डेरा
मोड सके ना मेरी बाहों को बैरी है जो मेरा
देश हेतु अर्पित कर निज तन सबका बना दुलारा है
भारतवर्ष स्वराष्ट्र पूर्ण भूमंडल का उजियारा है

हृदय हमारा भाव है लेकिन, दिव्य सजगता मेरा धन
मातृधरणि पर सदा निछावर किया युवाओं ने निज तन
दिव्य प्रेम की मूरत हम, पर यम भी हम से हारा है
भारतवर्ष स्वराष्ट्र पूर्ण भूमंडल का उजियारा है

ऋषि-मुनि मेरे दिव्य प्रेम के वृहत् रुप को जान गए
मोह त्यागकर जागा अर्जुन, सजग ज्ञान पहचान गए
गीता रुपी ज्ञान सुधा दे ,कृष्ण आँख का तारा है
भारतवर्ष स्वराष्ट्र पूर्ण भूमंडल का उजियारा है
विश्वबंधु-दीपक बन जलने बाला सुंदर-प्यारा है

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

-“जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति का गीत
-पेज संख्या 51
-आईएसबीएन 978-93 -82340-13-3
-रचनाकार-बृजेश कुमार नायक
– जागा हिंदुस्तान चाहिए कृति प्रकाशित होने का वर्ष -2013
-प्रकाशक -जे एम डी पब्लिकेशन ,नई दिल्ली
02-05-2017

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Pt Brajesh Kumar Nayak
Pt Brajesh Kumar Nayak
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1) प्रकाशित कृतियाँ 1-जागा हिंदुस्तान चाहिए "काव्य संग्रह" 2-क्रौंच सु ऋषि आलोक "खण्ड काव्य" 3-...