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भाभी बोलीं बाय-बाय...: हास्य घनाक्षरी

रोज रोज आते जाते, भाभीजी को छेड़ें भैया,
बाय-बाय चार बच्चों, वाली अम्मा गोरी हो .
भैया रोज लेते मौज, भाभी होतीं परेशान.
अच्छी नहीं खींचतान, ना ही जोराजोरी हो .
समझाया सहेली ने भाभीजी को इकरोज,
खुलेआम दे दो डोज, दुखे पोरी-पोरी हो.
ससुरे से चले भाय, भाभी बोलीं बाय-बाय,
चार में से दो बच्चों के, बापू शुभ होरी हो..

–इंजी० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

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Ambarish Srivastava
Ambarish Srivastava
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