भाई

भाई पर कविता
एक माँ के कोख से जन्म लेने वाले दो भाई अलग अलग दिशाओं में जा रहे है ,
,
जब कि अलग अलग माँ के कोख से जन्म लेने वाले नजदीक आ रहे है ।

उस ममतामय मूरत को दुखी कर भाई बापः की ही धन संपदा पर मौज उड़ा रहे है

उनकी पसीने की कीमत को दरकिनार कर हराम बना रहे है

इस धन में क्या रखा भाई ,,
एक दिन तो इस धरा पर रहना नही है,
,
अपने मुक्कदर को पहचानो अपने आप को ख़ुशी के दौर में ज्यादा देर खिलना नही है ।

इस ममता माँ को पहचानो जिसने तुझे किस लिए जन्म दिया ,

इस जग की झूठी माया के चक्कर में क्या दुष्कर्म किया ।

तुझे जब जब रोया दूध पिलाकर शांत चेन से सुलाया
फिर में तेरे मन के रोम रोम में दया की बूंद भी नही आई ।

राम लक्ष्मण ,कृष्ण दाऊ भाई
अलग अलग कोख के जन्मे थे ,,

फिर भी प्रेम रस , वात्सल्य रस ,वीर रस की नदियों को इस धरा पर उतारे थे ।
और हम भाई खून क्यों बहाए थे ।

रिश्तों में जहर क्यों उबलाए थे
राग ,द्वेष को छोड़ो
अपने आप को इस रस से जोड़ो ।

इस सतरंगी दुनिया में ,जरा सा अपने को तो पहचानो
और जीवन को माँ की देन समझ कर सम्भालो ।

✍✍प्रवीण शर्मा ताल
जिला रतलाम
त्तहसील ताल
टी एल एम् ग्रुप संचालक
स्वरचित कापीराइट कविता
दिनांक 8/4/2018
मोबाइल नंबर 9165996865

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