लघु कथा · Reading time: 1 minute

भविष्य

पड़ोस के वर्मा जी आज फिर अपने छोटे लड़के को स्कूल जाने के लिये समझा रहे थे। वह स्कूल न जाने के लिये रो रहा था और वर्मा जी उससे कह रहे थे- ‘‘ बेटे स्कूल नही जाओगे तो बड़े होकर अच्छे आफिसर कैसे बनोगे। अगर अच्छी पढ़ाई करोगे तो अच्छा भविष्य बनेगा अभी से ही स्कूल में मन लगाकर पढ़ा करो अच्छे बच्चे रोते नही है।’’ यह कहते हूुये उन्होने रोहित को रिक्शे पर बिठा दिया। मै अमित के साथ-साथ उस रिक्शे वाले को भी देख रहा था यही कोई 14-15 साल का होगा। बेचारे का भविष्य बनने से पहले ही बिगड़ गया। हमस ब तो अपने बच्चे का भविष्य बखूबी बनते है उन्हे डाॅक्टर, इंजीनियर या आफिसर बनाते हैं पर इसे तो भविष्य बनाने का मौका तक न दिया गया क्या इसके भविष्य मे यही रिक्शा चलाना तय था। क्या इसको अपना भविष्य बनाने का कोई अधिकार नही।

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"मुझे लिखने का हुनर न सही पर लिखने का जज्बा जरूर है । और जब तक ये जज्बा रहेगा मैं अपनी भावनाओ को शब्दों का रूप देता रहूँगा । मेरे…
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