” भरी है गगरी , छलक न जाये “

निर्जन राह,
रूप हठीला !
रूप गर्विता,
बदन गठीला !
आँचल सरकाया –
समीर ने,
यौवन मदमाता लहराये !!

कानन कानन,
अलसाया है !
लम्हा लम्हा,
भरमाया है !
सजी सादगी –
जागा जादू,
डग डग पल पल को भरमाये !!

ह्या नयन में,
देह सुघड़ !
गीत सजे हैं ,
अधरों पर !
कठिन परिश्रम –
भाग बदा,
आसमान भी झुक झुक जाये !!

बृज व्यास

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