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भगवान

सुनील पुष्करणा

सुनील पुष्करणा "कान्त"

कविता

April 11, 2017

“भगवान”
भूमि
गगन
वायु
अग्नि
नीर
इन पांच तत्तवों से मिलकर बनता है “भगवान”
अर्थात हम सब “भगवान” हैं…
परन्तु अपने कर्मोँ के अनुसार कहलाते हैं-
भगवान,इंसान,शैतान

सुनील पुष्करणा

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