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भगवान तूने क्या किया

मंजुला प्रसूति विभाग के बेड पर बेशुध होकर बैठी थी वही हाल गोपाल का भी था। कौन आ रहा कौन जा रहा है उनको कुछ भी होश नही था। रो-रो कर उन दोनों का बुरा हाल हो गया था, उनके आंखों के आँसू भी सुख गए थे। उनकी ऐसी दशा देख कर हम सबकी आँखे नम हो गयी थी।
मंजुला और गोपाल की शादी को 20 वर्ष हो गए थे, लेकिन घर में बच्चे की किलकारी नही गूँजी थी। बड़े से बड़े डॉक्टर, वैद्य को दिखाया जिसने जो कहा पति-पत्नी ने किया लेकिन कुछ भी फायदा नही हुआ।
एक दिन अचानक गोपाल ने मुझसे कहा कि भाई मैं पापा बनने वाला हूं, ये जानकर मुझे बहुत खुशी की भगवान ने 20 वर्ष बाद लेकिन बेचारे की आखिर सुन ही लिया। गोपाल के घर खुशियों का माहौल था क्योंकि अल्ट्रासाउंड के माध्यम से ये पता चल गया था कि मंजुला के गर्भ में जुड़वां शिशु पल रहे है। डॉक्टर ने भी बोल दिया था कि बच्चों का जन्म सातवें महीने में करा लेंगे दोनों शिशु माँ के गर्भ में स्वस्थ है। धीरे-धीरे पांच महीने बीत गए एक दिन गोपाल और मंजुला ने तय किया कि कल रूटीन चेकअप करा लेते है। दूसरे दिन सुबह गोपाल जल्दी उठ गया और सोचा कि हॉस्पिटल जाने से पहले मंदिर होकर आता हूँ। गोपाल घर से मंदिर के लिए निकला ही था कि मंजुला ने आवाज लगाया कि मेरे पेट मे बहुत तेज़ दर्द हो रहा है। गोपाल तुरंत मंजुला को लेकर हॉस्पिटल भागा। हॉस्पिटल में आधे घंटे के बाद डॉक्टर गोपाल से बोलता है कि जल्द से जल्द अबॉर्शन नही किया गया तो मंजुला के जान को खतरा क्योंकि दोनों शिशुओं की धड़कन रुक गयी है। गोपाल जब ये सुनता है तो उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। उसके मुंह से बस एक ही आवाज निकलती है भगवान तूने क्या किया। अबॉर्शन के होने के बाद पता चलता है कि दोनों शिशु लड़के थे। मंजुला और गोपाल के जीवन में 20 वर्षों बाद जो खुशी आयी थी भगवान ने उसे 20 सेकंड में ही उनसे छीन लिया था।

….आलोक पांडेय गरोठ वाले

Competition entry: साहित्यपीडिया कहानी प्रतियोगिता
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