भगवान की सत्ता में सभी समान

निर्धन जग में कोय ना, ना कोई धनवान।
ईश् नजर से देख लों,, सब रूपमें समान।।२।।

झोपडी और महल से, मनु में ना कर भेद।
ईश्वर माया एक सी,,कर्म करत हैं कैद।।१।।

ग़रीब अमीर न कहिये, कहना हैं इंसान।
जीवं बडी माया नहीं,,रहा बडा ईमान।।३।।

किसी को हिन ना कहिये,करता उसके घांव।
सब रूप में समान हैं,फिर क्यूं आगे पांव।।४।।

ऊंच-नीच नाहिं किजियें, करना हैं तो कर्म।
कहे से अच्छा दिजियें,,सबसे बडा ह धर्म।।५।।

प्रभु सत्ता सब एक सी, छोटा बडा न कोय।
माया जीवं न मोल की,पीछे क्यों मैं पोय।।६।।

रणजीत ना भेद करों ,करने दो तुम काम।
जीवन मिला अमोल का,,करलों ऊंचा नाम।।७।।

रणजीत सिंह रणदेव चारण
गांव -मुण्डकोशियां, राजसमनंद
7300174927

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