भगवान ! एक बार मानव बनके देख …

कितना दुष्कर होता है मानव जीवन ,
धरती पर तू एक बार जन्म लेकर देख ।

अवतार रूप में तुमने बहुत यूं जन्म लिए ,
बस एक बार साधारण मानव बनके देख ।

गरीबी,भुखमरी और नौकरी के लिए संघर्ष,
किस प्रकार करता है,तू भी करके तो देख ।

प्राकृतिक आपदा और महामारी के प्रकोप से,
डरी- सहमी उसकी जीवन ज्योति को देख ।

ऐसे कितने मुश्किल हालातो से लड़ती हुई,
डगमगाती कभी संभलती जिजीविषा को देख।

कैसे सहन करेगा कठपुतली बनना नेताओं की ,
झूठे आश्वासन की डोर पर कैसे नाचता है वो देख !!

आशा-निराशा की नाव पर अरमानों को संभाले ,
उसपर भाग्य-दुर्भाग्य का झंझावात को देख ।

तू तो आसमान में छुप के बैठा देखता सारे तमाशे,
मुक दर्शक बनना छोड़ के भुक्त भोगी बनके देख ।

तभी तुझे आभास होगा मानव जीवन के कष्टों का,
उसकी कठिन परिस्थितियों को एक बार जी के तो देख ।

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ओनिका सेतिया 'अनु '
ओनिका सेतिया 'अनु '
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नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा... View full profile
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