कविता · Reading time: 1 minute

भगत सिंह की शहादत

कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।

सुखदेव राजगुरु की कुर्बानी
हम सबने सुनी है वो कहानी
जब हुई भारत माता पर न्योछावर
सरदार भगत सिंह की जवानी।।

कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।

जिस माता ने उन्हें जन्म दिया
देश की खातिर उसको भी छोड़ दिया
मच गया था अंग्रेजों में हड़कंप
जब असेंबली में बम फोड़ दिया।।

कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।

उसकी वीरता और निडरता की
लाहौर की वो जेल भी है गवाह
मिले देश को आजादी जल्द
थी उस वीर की बस यही चाह।।

कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।

वो हंसते हंसते झूल गए फांसी पर
गाकर मेरा रंग दे बसंती चोला
धन्य है जन्म देनेवाली मां उनकी
देखकर ये सारा हिंदोस्तान बोला।।

कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।

प्रेरणा है युवाओं की वो आज भी
भगत सिंह ज़िंदा है हमारे दिलों में आज भी
जब कभी बात होती है शहीदों की
नाम उनका पहले लिया जाता है आज भी।।

कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।

फांसी पर चढ़ा जब वो वीर
भारत माता भी रोई होगी
कुछ पल के लिए उसकी
आंखें भी नम तो हुई होगी।।

कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।

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