Skip to content

भक्त की पुकार

पं.संजीव शुक्ल सचिन

पं.संजीव शुक्ल सचिन

गज़ल/गीतिका

January 11, 2018

———————–
मईया द्वारे तेरे हम खड़े हैं अभी
अश्रु आंखों से मेरे निकल जायेंगे
आज मुझको मिली जो ना भक्ति तेरी
सच ये मानों यही पे हीं मर जायेंगे।।१।।

कर करम अपनी भक्ति तूं दे दे अभी
पा के भक्ति तुम्हारी नीखर जायेंगे
जो न मुझपे किया तुने कृपा अभी
सच ये मानों यहीं पर ही मर जायेंगे।।२।।

मैं हूँ बालक तुम्हारा तू मईया मेरी
तेरी कृपा से भव पार कर जायेंगे
जो करम आज मुझपे न बरसे तेरी
सच ये मानों यहीं पर हीं मर जायेंगे।।३।।

हर तरफ आज फैली है अज्ञानता
ज्ञान तुझसे मिला तो सवर जायेंगे
ज्ञान तुमसे मिला जो ना मईया मेरी
सच ये मानों यही पर हीं मर जायेंगे।।४।।

हर तरफ बहशीयाना हवाँ चल रही
माँ सम्भालो नहीं तो बीखर जायेंगे
अब न जाऊ कभी दर से तेरे कहीं
सच ये मानों यहीं पर ही मर जायेंगे।।५।।
……….
©®पं.संजीव शुक्ल “सचिन”
11/1/2018

Share this:
Author
पं.संजीव शुक्ल सचिन
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।
Recommended for you