Jul 15, 2017 · कविता
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भक्ति रस

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भक्ति रस से भरे हृदय में सदा ईश्वर रहें समाई।
है कल्याण उसी का जिसने ये ज्योति जलाई।

भक्ति रस से निकले वाणी कर्णप्रिय सुखदाई।
भक्ति रस का प्याला पीकर भाग्य उदय हो जाई।

भक्ति रस से ही जीवन में सुमधुर रस है समाई।
भक्ति रस के बिना जीवन निरस बड़ा कष्टदाई।

कामी,क्रोधी,लोभी कभी भी भक्ति रस ना पाई।
भक्ति रस स्वच्छ व निर्मल हृदय में सदा समाई।

प्रेम बिना भक्ति नहीं,भक्ति रस में प्रेम समाई।
अहंकार का त्याग करें,वो भक्ति रस में नहाई।

भक्ति रस में डूब के मीरा जोगन रूप बनाई।
भक्ति रस से पुकारी द्रोपदी दौड़ पड़े कन्हाई।

भक्ति रस अनमोल सीढ़ी, जो चढ़े वो मुक्ति पाई ।
धन्य है वो भक्त जिसने भक्ति रस की दौलत पाई।
???—लक्ष्मी सिंह ?☺

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is... View full profile
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