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बड़ी है इमारत बड़ा ये नगर है

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गीत

July 17, 2016

बड़ी है इमारत बड़ा ये नगर है
यहाँ छत न आँगन मगर पास घर है

सवेरे सभी हड़बड़ी में निकलते
बिछी चाँदनी में घरों को पहुँचते
लगें एक मेहमान से घर में अपने
अलग ज़िन्दगी का यहाँ पर सफर है
बड़ी है इमारत बड़ा ये नगर है

नज़र हर जगह बस कबूतर ही आते
गुटर गूं गुटर गूं यही गुनगुनाते
नहीं चहचहाहट यहाँ पंछियों की
घुला जो धुएँ का हवा में जहर है
बड़ी है इमारत बड़ा ये नगर है

लड़ें माँ पिता घर में तन्हाइयों से
हुआ दूर रिश्ता बहन भाइयों से
अकेले अकेले जिए जा रहे ये
न अपनी न इनको किसी की खबर है
बड़ी है इमारत बड़ा ये नगर है

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद(उ प्र)

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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