Apr 29, 2017 · कविता
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बड़ा अच्छा लगता है

बड़ा अच्छा लगता है

उगते सूरज की लालिमा को तकना
बैलो के गले में घंटी का बजना
डाल डाल चिड़ियों का फुदकना
कोमल लताओं पर पुष्पों का खिलना
झूमती शाखाओं पर पत्तियों का हिलना
झरने से बहती जलधारा का झरना
अमवा की डारी पे कोयल का कूकना
अरण्य में हिरणो का इधर से उधर विचरणा
टक-टकी लगाये ये मनोहारी दृश्य देखना
सचमुच ह्रदय को बड़ा अच्छा लगता है !!

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डी. के. निवातिया

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ ,... View full profile
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