Nov 20, 2020 · लघु कथा
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ब्रेक अप इन ट्वेंटी वन डेज

बाथरूम में बैठकर मोबाईल की रिंग का वैट कर रहा था , गरम पानी कब का ठंडा हो गया पता ही नही चला परन्तु अभी तक मोबाईल नही बजा था और उसकी रिंगटोन , तू ही मेरी शुभ है शुवाह है तू ही दिन है मेरा , अभी तक नही गूंजी ।
शरीर और पानी दोनों ठंडे हो चुके थे और दिल भी अंदर से ठंडा हो चूका था किन्तु दिमाग अब भी लगातार इम्पल्स शरीर के अंगों को भेज रहा था जिससे महसूस हो रहा था कि प्यार के कोमा में व्यक्ति का साथ केवल दिमाग ही देता है क्योंकि दिल तो पैरालाइज हो चूका होता है।
मोबाईल की रिंग बजी और बिजली की भांति अपनी स्टडी छोड़कर मोबाईल को देखा तो स्क्रीन पर लिखा था विनी ,नाम देख कर दिल खिल गया प्रशन्न हो गया किन्तु होठों ने भावनाओ को नियंत्रित करते हुए दांतो को चमकने नही दिया और हल्की सी मुस्कुराहट के साथ एंड्राइड फ़ोन की हरे गोले को खींच दिया ।
– तुम कहाँ चले गए थे , तुमको पता है कि मैं कितनी वैचेन हो जाती हूँ मुझे नर्वस डायरिया है और तुम हो समझते ही नही।
– अरे नही मैं यहीं तो था तुमको फोन भी किया था बट नेटवर्क प्रॉब्लम की बजह से फोन गया नहीं ।
वास्तव में सुमित एक साथ दो नावों पर पैर रखकर जीवन और कैरियर के भंवर को पार करने की कोशिश कर रहा था । वह सिविल सर्विस की तैयारी के लिए पढ़ने के समय अपने मोबाइल को ऐरोप्लेन मॉड पर कर देता था जिससे विनी को लगे कि नेटवर्क प्रॉब्लम है और स्विच ऑन होने से वो नाराज भी ना हो । और दूसरी तरफ अपने पुराने अन कहे वन साइड लव जो अचानक ही उसकी जिंदगी में दुबारा पुरे 4-5 साल बाद आ गया उसको भी जीने की कोशिश कर रहा था। वास्तव में सिविल सर्विस की तैयारी में मिल रही असफलता उसे तोड़ रही थी घर समाज में उसकी रौनक खत्म हो चुकी थी वस तायने और अयोग्यता का जीवन ने उसे एकाकी बना दिया था ऑफिस से भैया भाभी के घर और फिर सिविल सर्विस की कोचिंग तक उसकी जिंदगी सिमट चुकी थी ना कोई दोस्त बचा था ना ही दिल की सुनने बाला । मम्मी पापा भी भैया भाभी के घर पर उसे छोड़कर चैन की सांस ले रहे थे ।
– अच्छा अब बताओ अब तो ठीक हो गया तुम्हारा नर्वस डायरिया ..? हाँ ठीक हो गया ,हा हा हा , ।
पर ऐसे ना जाया करो ।
– मैं कहाँ जाता मैं तो हरदम तुम्हारे साथ ही तो रहता हूँ ,
– अच्छा कहा साथ हो बताओ तो..?
– अपनी आँखे बंद करो
– लो कर ली
– अब मेरा नाम लो
– सुमित
– अब दिखा
– हाँ दिख गये
– फिर बताओ कैसा लग रहा हूँ..?
– तुम तो टू थाउजेंड नाइन बाले सुमित दिख रहे हो । मुझे तो अभी बाले सुमित को देखना है ।
– अच्छा
– हाँ जी ।
– अपनी फोटो भेजो
– अरे अभी अभी में बाहर से आया हूँ थोड़ा कपड़े-सपड़े डाल के भेजता हूँ।
– नही तुम पहले भी स्मार्ट थे अब भी होंगे प्लीज भेजो ।
– ओके
– सुमित ने जिम से सुडौल हुई मसल्स का फोटो लेते हुए व्हाट्सअप पर फोन के समय ही सेंड कर दी
ये लो सेंड कर दी
– अच्छा देखती हूँ , तुम ना ज्यादा बॉडी ना दिखाया करो शर्दी पड़ रही है शर्दी लग जाएगी
– अरे भैया , मैं रूम में था , और हीटर भी चल रहा है सो यहाँ शर्दी नही लग रही ही ।
– तुम चुप रहो
– अच्छा ये बताओ फोटो कैसी लगी
– बहुत स्मार्ट लग रहे हो ,ऐसा लगता है तुमको खा जाऊं ।
– यार तुम प्योर वेग हो ।
– मैं तो फिर भी खा जाऊंगी ।
– चलो अब तुम भेजो ।
– मैं नही भेज रही ।
– क्यूँ..?
– वस ऐसे ही ।
– ये तो कोई बात नही हुई जी ।
– अच्छा बताओ तुम क्या करोगे मेरी फोटो का ..?
– मैं देखना चाहता हूँ कितनी सुंदर हो गयी हो..?
– ज्यादा शैतानी ना करो , मैं फोन रख रही हूँ , मम्मी बुला रही है ।
– ठीक है जाओ , मम्मी के पास ।
– अरे तुमने तो सच ही मान लिया ।
– तुमने ही तो कहा मम्मी बुला रही है ।
– अच्छा चलो सेंड करती हूँ , बट थोड़ी देर के लिए मोबाईल कट करना होगा क्योंकि में तुम्हारी तरह सेल्फी नही ले पाती ।
– ओके , पर कुछ मस्त सी और सेक्सी सी फोटो क्लिक करना ।
– अच्छा सेक्सी फोटो तुम अपनी दिल्ली बाली लड़कियों से ही देखना मैं तो सिंपल फोटो ही सेंड करूंगी ।
चलो ओके ।
फोन रख कर सुमित अगेन अपनी स्टडी पर कंसन्ट्रेट करने लगा बट अभी भी दिमाग में विनी की ही बातें चल रही थी।
चेयर पर पीठ टिकाकर और गर्दन पीछे करके पैरों को सिंगल बेड पर रखकर सन 2009 की कोचिंग बाले दिन सोचने जब वह एम् बी ए की कोचिंग में विनी के पीछे बैठता था । उसका फ्रेंड सौरभ हमेशा उसकी माजक बनाता था कि इसके कोई मोटी , कोई औरत जैसी लडकिया ही पसन्द आती है ।
ये सोचते हुए सुमित सौरभ की बात याद कर हंसने लगा।
किंतु चेयर पर बैठे हुए सुमित विनी की उस कोमलता और सौम्यता को नही भुला था जिस पर उसका दिल फिसल गया । वह उस खुसबू को भी नही भुला था जो उसके भीगे बालों से शेम्पू की आती थी और जिसे वह उसके पीछे बैठकर खुशबु लेता रहता था ।
वास्तव में आशिकों का कोई मिजाज नही होता और ना ही कोई स्टेंडडर उनको पता नही कि उन पर किस बात से आशिकी का जुनून सबार हो जाय । क्योकि उसे किसी ने बताया था कि किसी के क्लास में एक ऐसा लड़का था कि वह उसकी जी.ऐफ के पसीने की गंध के दुपट्टे को अपने बैग में रखते हुए शहर से बाहर जाता था, जबकि उस दुपट्टे की गंध सूंघकर उसके मित्र को पल्टी तक हो गयी थी।
सच में आशिकी कितना कुछ बदल देती है एक पत्थर जैसे आदमी में भी दिल धड़का देती है , परन्तु आजकल तो लव भी जिहाद होने लगा है ।
यही सोचते हुए रात के 12 बज गये और सुमित ने ना तो डिनर किया और ना ही स्टडी पर ध्यान लगाया ।भाभी ने डिनर के लिए बुलाया भी था किंतु बोल दिया भूख नही है।
मतलब प्यार के सिम्पटम पुरे आने लगे थे……
सुमित ने वही ठंडा पानी डालकर नहाया और उस बैचेनी और उदासी को मिटाने की कोशिश की जो उसके जाने से उसके दिल और दिमाग में छा गयी थी और ना ही उसकी हिम्मत थी कि वह पानी अगेन गर्म करें क्योकि उसको सिविल सर्विस एक्क्षाम के लिए मॉक टेस्ट देंने जाना था।
इसलिए वह जल्दी से नहाकर अपना बैग लटकाकर बाइक स्टार्ट कर मॉक टेस्ट के लिए कोचिंग पहुँच गया। पहले उसने पिछले टेस्ट का रिजल्ट देखा जिसमे उसकी रैंक सातवीं थी । किन्तु विनी के जाने के गम से वह खुश नही हो सका और उन्ही बातों को सोचने लगा कि उसने फोन तक नही उठाया और इक्कीस दिन पहले जिस लड़के से नफरत करने के बात बो कह रही थी और रात के 2 बजे फोन पर रो रही थी क्या वो वही विनी थी जिसे मैंने संभाला था उसके रोने को शांत किया और वह पूरा स्पेस को भरा जो उसके पुराने बी. एफ के जाने से खाली हो गया था उसके फेस पर वही पुरानी मुस्कान लौटाई अपनी स्टडी छोड़कर उसकी हर एक बात पर ध्यान दिया और उसको पूरा समय दिया उसके फोटो की तारिफ कर उसके कॉन्फिडेंस को पुनः बहाल किया और जब सुमित उसमे डूबने लगा तो उसने पहले तो फोन नही उठाया और एक और जब फोन उठाया तो बोल दिया सुमित , सतेंद्र ने मेरे पापा से बात कर मुझसे शादी करने को मेरे पापा को राजी कर लिया है…..
वस यही सब सोच रहा था
फिर कोचिंग बैल बजी और सुमित उसी उदासी भरे मन से मॉक टेस्ट देने चला गया….

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सोलंकी प्रशांत
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Working as Govt. Pharmacist In Delhi. मैं कुछ नही, सिवाय चलती-रूकती आत्मा के । इस... View full profile
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