Apr 14, 2021 · कविता
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*”ब्रम्हचारिणी माँ”*

*”ब्रम्हचारिणी माँ”*
जप तप आराधना में लीन हो ,
साधना शक्ति चेतना जगाती।
शिव को पति रूप में पाने को ,घोर तपस्या से ही ब्रम्हचारिणी कहलाती।
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सुंदर सौम्य दिव्य स्वरूपिणी निर्मल स्वभाव हमको लुभाती।
दांये कर जपमाला बाँये कमंडल ,
जप तप नियम संयम आराधना करना बतलाती।
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परम चेतनामयी त्रिलोकी अर्धनारीश्वर ,
सदचित आनंद सत्कर्मों पर चलना हमें सिखलाती।
भक्तों को सद्बुद्धि दे अनंत सुख समृद्धि दे जाती।
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विपदा की घड़ी में संघर्षो से जूझ,
कर्त्तव्य पथ पर सत्मार्ग दिखलाती।
साधक मन जब सिद्धि हेतु जप तप आराधना में लीन हो,
सर्वसिद्धि आराधना से दुःख कष्टों से मुक्ति दे जाती।
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रोग शोक दुख कष्टों को हरती ,
भक्तों में आस्था विश्वास जगाती।
समस्त विश्व में प्राणियों को अपना नवल स्वरूप *ब्रम्हचारिणी* सौम्य रूप दिखलाती।
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तपस्या में लीन आलौकिक दिव्य शक्ति ,
भक्तिमय रस चैतन्य कर जाती।
ध्यान साधना कठिन तप वैराग्य ज्ञान से ही ,
नियम संयम सेवा भावना जागृत कर जाती।
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*या देवी सर्वभूतेषु माँ*
*ब्रम्हचारिणी रूपेण संस्थिता*
*नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः*…..! ! ! 🙏🚩
*जय माँ ब्रम्हचारिणी*
*शशिकला व्यास*✍️

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Shashi kala vyas
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एक गृहिणी हूँ मुझे लिखने में बेहद रूचि रखती हूं हमेशा कुछ न कुछ लिखना... View full profile
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